रंजीत कपूर : थियेटर के एवरेस्ट पर झण्डारोहण से चिंटू जी के सृजन तक

विख्यात थियेटर निर्देशक (और अब फिल्म निर्देशक भी) और लेखक रंजीत कपूर की रगों में थिएटर एक तरह से बचपन से ही समाया हुआ था...

रांझा रांझा : बुल्ले शाह के अद्वैत से गुलज़ार के द्वैत तक

पहुँचे हुये संतो, सिद्धों और सूफियों ने हमेशा अपने और प्रभु के बीच अद्वैत की कल्पना की है या बात की है या दुनिया को...

किशोर कुमार : यादों पे बसर करते हैं

किशोर कुमार एक विलक्षण शख्सियत रहे हैं हिन्दी सिनेमा की और उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है हिन्दी सिनेमा के प्रति, न केवल...

3-Iron (2004): यथार्थ और कल्पना के मध्य रचा जीवन

फिल्म का नायक अगर पूरी फिल्म में एक भी संवाद न बोले और नायिका भी केवल दो बार मुँह से आवाज निकाले, एक बार चीखने के लिये और...

Offside (2006) : सिनेमा और स्वतंत्रता की विजय

धरती पर मनुष्य की आबादी का आधा हिस्सा, स्त्रियाँ, भी पुरुषों की तरह जीवन जीने का अधिकार रखती हैं या नहीं। या सारी लोक...

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