धरम(2007) : दिल मंदिर-मस्जिद-गिरजा-गुरद्वारा कुछ भी नहीं

अदब आमोज़ है मयखाने का जर्रा-जर्रा सैंकड़ों तरह से आ जाता है सिजदा करना इश्क पाबंदे वफा है न कि पाबंदे रसूम सर झुकाने को...

शान(1980): शोले की आन, बान और शान में घटोत्तरी

सत्तर का दशक बीत चुका था, अस्सी का दशक धड़ल्ले से आगमन कर गया था। अमिताभ बच्चन सफलता के पुष्पक विमान पर उड़ान भरते हुये...

एक रुका हुआ फैसला (1986): निष्पक्ष तार्किकता की विजय

कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध जो तटस्थ हैं समय देखेगा उनके भी अपराध पर दिनकर...

सौदागर (1973) : चाहत जब तिजारत बन जाये

नारी बिचारी है पुरुष की मारी है तन से क्षुधित है मन से मुदित है लपककर झपककर अंत में चित्त है (रघुवीर सहाय) पतझड़ को ही...