दुनिया रंग रंगीली बाबा (धरती माता 1938) – के.एल.सहगल होने का अर्थ

पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक में समूचा भारत कुंदनलाल सहगल की आवाज़ के मोहपाश में यूँ ही नहीं बंध गया था। के.एल सहगल की...

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं (रोड टू सिक्किम 1969): मुकेश और प्रेमी ह्रदय की भावनायें

यह बात निर्विवाद रुप से सत्य है कि प्रेमी ह्रदय के उदगार, चाहे वे खुशी से भरे हों या ग़म से, उन्हे प्रकट करने में मुकेश को...

तुम महकती जवां चाँदनी हो (प्यासे दिल 1974) : रोमांस बिखेरते मुकेश

एक उम्दा गीत हरेक विभाग में उम्दा होता है। बढ़िया बोल, जिन्हे सुनकर श्रोता के अंदर वे कल्पनायें जन्म लेनें लगें जो कि...

सरस्वतीचन्द्र : गुनाहों का देवता?

फिल्म “सरस्वतीचंद्र” के कथानक और धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध उपन्यास “गुनाहों का देवता” के मध्य समानतायें तलाश...

आँधी (1975): तेरे बिना शिकवे न हों पर ज़िंदगी ज़िंदगी भी तो नहीं

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को। पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर...

« Older Entries