तू कहाँ ये बता इस नशीली रात में [तेरे घर के सामने(1963)]: मधुशाला बसाता एक नशीला रोमांटिक गीत

विजय आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म- तेरे घर के सामने, के नायक- राकेश (देव आनंद) और नायिका- सुलेखा (नूतन) द्वारा आपस में...

मौसम (2011) : आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता

आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता जब जुल्फ की कालिख में घुल जाये कोई राही बदनाम सही...

तीन देवियाँ (1965) : जब कुछ नहीं तो ये इशारे क्यों कई ख्वाब देख डाले एक दीवाने ने

टैगोर ने कभी लिखा था - A Lad there is and I am that poor groom That is fallen in love knows not with whom यह किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज पर खड़े युवाओं में से कुछ की...

आशा भोसले : जैसे हो गूँजता सुरीला सुर किसी सितार का

शुरु से ही आशा भोसले की गायिकी उस ऊँचाई पर उड़ती रही है जहाँ से वह हरेक दौर में सक्रिय बड़े से बड़े संगीतकार को इठलाकर...

कुहू कुहू बोले कोयलिया (सुवर्ण सुन्दरी – 1957) : मधुर रागमाला का आभूषण पहने नायाब संगीत

हिन्दी फिल्म संगीत में संगीतकारों द्वारा रागमलिका या रागमाला बनाये जाने के उदाहरण बहुत नहीं होंगे। ज्यादातर गीत...