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आँधी (1975): तेरे बिना शिकवे न हों पर ज़िंदगी ज़िंदगी भी तो नहीं

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को। पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर...

सत्यकाम (1969) : भारत में ईमानदारी की हत्या

सत्यकाम हमेशा विचलित करती है और अगर कोई व्यक्त्ति ईमानदारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील है तो उसे...

नमकीन (1982) : ज़िंदगी की बिसात पर खेलते जल गये धूप में तो साया हो गये

नमकीन में कहानी के क्षेत्र में गुलज़ार को एक उम्दा कहानी समरेश बसु की तरफ से मिल गयी थी और उस कहानी को उन्होने बड़े ही...

सौदागर (1973) : चाहत जब तिजारत बन जाये

नारी बिचारी है पुरुष की मारी है तन से क्षुधित है मन से मुदित है लपककर झपककर अंत में चित्त है (रघुवीर सहाय) पतझड़ को ही...

मुसाफ़िर (1957) : एक सफ़र की शुरुआत

सुधांशु याद कर रहे हैं ह्रषिकेश मुखर्जी की निर्देशक के रुप मे बनायी गयी प्रथम फिल्म मुसाफ़िर को जो सन 1957 में प्रदर्शित...

अभिमान(1973): श्रेष्ठ है कला और प्रतिभा, स्त्री या पुरुष नहीं

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और...

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