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मुरली मेरे श्याम की(1985): कान्हा की मधुर बांसुरी का रस्सावादन वाया गुलज़ार एवम रघुनाथ सेठ

बांसुरी का तन बिल्कुल सीधा है, मन में बड़े बल हैं, कितनी बल खाती भावनाओं का कितनी तरह उच्चारण करती है, गीता के बोल तो बाद...

The Vanishing(1988): गुम साथी की तलाश पर आधारित एक ठोस थ्रिलर

किसी व्यक्ति के करीबी प्रियजन की अनायास उत्पन्न हो गयी अनुपस्थिति उस व्यक्ति के जीवन में जानलेवा स्थितियाँ उत्पन्न...

रावण(1984) : रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़

तेरे इश्क की एक बूँद इसमें मिल गयी थी इसलिये मैंने उम्र की सारी कड़वाहट पी ली ….( अमृता प्रीतम) एक तो इश्क वह है जो किसी...

अंगूर (1982) : विशुद्ध हास्य की मधुशाला

करीब सवा चार सदी पहले विश्व प्रसिद्ध लेखक विलियम शेक्सपियर ने अंगूरों का एक बाग लगाया था और इस विनयार्ड का नामकरण...

नमकीन (1982) : ज़िंदगी की बिसात पर खेलते जल गये धूप में तो साया हो गये

नमकीन में कहानी के क्षेत्र में गुलज़ार को एक उम्दा कहानी समरेश बसु की तरफ से मिल गयी थी और उस कहानी को उन्होने बड़े ही...

एक रुका हुआ फैसला (1986): निष्पक्ष तार्किकता की विजय

कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध जो तटस्थ हैं समय देखेगा उनके भी अपराध पर दिनकर...

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