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तीन देवियाँ (1965) : जब कुछ नहीं तो ये इशारे क्यों कई ख्वाब देख डाले एक दीवाने ने

टैगोर ने कभी लिखा था - A Lad there is and I am that poor groom That is fallen in love knows not with whom यह किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज पर खड़े युवाओं में से कुछ की...

सरस्वतीचन्द्र : गुनाहों का देवता?

फिल्म “सरस्वतीचंद्र” के कथानक और धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध उपन्यास “गुनाहों का देवता” के मध्य समानतायें तलाश...

धरम(2007) : दिल मंदिर-मस्जिद-गिरजा-गुरद्वारा कुछ भी नहीं

अदब आमोज़ है मयखाने का जर्रा-जर्रा सैंकड़ों तरह से आ जाता है सिजदा करना इश्क पाबंदे वफा है न कि पाबंदे रसूम सर झुकाने को...

एक रुका हुआ फैसला (1986): निष्पक्ष तार्किकता की विजय

कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध जो तटस्थ हैं समय देखेगा उनके भी अपराध पर दिनकर...

नसीम(1995): अनेकता में एकता की विरासत पर हमला

सईद मिर्जा की फिल्म नसीम कई मायनों में एक महत्वपूर्ण फिल्म है। यह समकालीन समस्यायों पर अपना ध्यान केंद्रित करने से...

Ijaazat (1987) : चाँदनी में जमीं से उठते सायों की स्मृतियाँ

इजाज़त के शुरु के कुछ मिनट और कतरा कतरा गाने का फिल्मांकन , दोनों बेहद जिम्मेदारी से भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने का काम...

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