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दुनिया रंग रंगीली बाबा (धरती माता 1938) – के.एल.सहगल होने का अर्थ

पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक में समूचा भारत कुंदनलाल सहगल की आवाज़ के मोहपाश में यूँ ही नहीं बंध गया था। के.एल सहगल की...

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं (रोड टू सिक्किम 1969): मुकेश और प्रेमी ह्रदय की भावनायें

यह बात निर्विवाद रुप से सत्य है कि प्रेमी ह्रदय के उदगार, चाहे वे खुशी से भरे हों या ग़म से, उन्हे प्रकट करने में मुकेश को...

तुम महकती जवां चाँदनी हो (प्यासे दिल 1974) : रोमांस बिखेरते मुकेश

एक उम्दा गीत हरेक विभाग में उम्दा होता है। बढ़िया बोल, जिन्हे सुनकर श्रोता के अंदर वे कल्पनायें जन्म लेनें लगें जो कि...

मुरली मेरे श्याम की(1985): कान्हा की मधुर बांसुरी का रस्सावादन वाया गुलज़ार एवम रघुनाथ सेठ

बांसुरी का तन बिल्कुल सीधा है, मन में बड़े बल हैं, कितनी बल खाती भावनाओं का कितनी तरह उच्चारण करती है, गीता के बोल तो बाद...

दो नैनों में (खुशबू) : निर्देशक, कवि गुलज़ार की कल्पना और तकनीक का नमूना

यूँ तो खुशबू के सभी गीत एक से बढ़कर एक हैं पर फिल्म की परिस्थितियों के अनुरुप – दो नैनों में आँसू भरे हैं, गीत तो कमाल का...

जाने वाले मुड़ के (श्री 420) : राज कपूर का तकनीकी पक्ष

राज कपूर की इस सर्वश्रेष्ठ फिल्म के गीत लिखे थे हसरत जयपुरी ने। फिल्म में ऐसी परिस्थितियाँ बनती हैं कि नादिरा और नीमो...

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