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स्वामी(1977): देखो कहीं टूटे नहीं प्रेम के ये धागे

नरेन्द्र (विक्रम) और मामा जी (उत्पल दत्त) जीवन में मनुष्य की स्वतंत्रता और जीवन दर्शन पर बातें कर रहे हैं। एक विषय पर...

शान(1980): शोले की आन, बान और शान में घटोत्तरी

सत्तर का दशक बीत चुका था, अस्सी का दशक धड़ल्ले से आगमन कर गया था। अमिताभ बच्चन सफलता के पुष्पक विमान पर उड़ान भरते हुये...

सौदागर (1973) : चाहत जब तिजारत बन जाये

नारी बिचारी है पुरुष की मारी है तन से क्षुधित है मन से मुदित है लपककर झपककर अंत में चित्त है (रघुवीर सहाय) पतझड़ को ही...

अभिमान(1973): श्रेष्ठ है कला और प्रतिभा, स्त्री या पुरुष नहीं

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और...

Dastak (1970): मीना बाजार की सीमाओं पर रहते हामिद सलमा

दस्तक उन फिल्मों में से है जिन्हे (जिनकी कहानी को) चाहे पढ़ा जाये या देखा जाये वे एक गहरा असर पाठक और दर्शक पर छोड़ ही जाती...

Achanak (1973): गुलज़ार थ्रिलरलैंड में

गुलज़ार साब की अपनी बनायी फिल्मों में “लेकिन” और “अचानक” दो ही थ्रिलर हैं। अचानक में गुलज़ार समाज में साधारणतया...

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