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तीन देवियाँ (1965) : जब कुछ नहीं तो ये इशारे क्यों कई ख्वाब देख डाले एक दीवाने ने

टैगोर ने कभी लिखा था - A Lad there is and I am that poor groom That is fallen in love knows not with whom यह किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज पर खड़े युवाओं में से कुछ की...

सत्यकाम (1969) : भारत में ईमानदारी की हत्या

सत्यकाम हमेशा विचलित करती है और अगर कोई व्यक्त्ति ईमानदारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर बेहद संवेदनशील है तो उसे...

Khamoshi (1969): तुम्हारा इंतजार है तुम पुकार लो

जरुरी नहीं कि एक सलीके से फैला हुआ निबंध वह असर छोड़ जाये जो एक कविता, जो कि पूरी तरह से अतार्किक लगती है, छोड़ जाती है। यूँ...