तू कहाँ ये बता इस नशीली रात में [तेरे घर के सामने(1963)]: मधुशाला बसाता एक नशीला रोमांटिक गीत

विजय आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म- तेरे घर के सामने, के नायक- राकेश (देव आनंद) और नायिका- सुलेखा (नूतन) द्वारा आपस में...

तीन देवियाँ (1965) : जब कुछ नहीं तो ये इशारे क्यों कई ख्वाब देख डाले एक दीवाने ने

टैगोर ने कभी लिखा था - A Lad there is and I am that poor groom That is fallen in love knows not with whom यह किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज पर खड़े युवाओं में से कुछ की...

कुहू कुहू बोले कोयलिया (सुवर्ण सुन्दरी – 1957) : मधुर रागमाला का आभूषण पहने नायाब संगीत

हिन्दी फिल्म संगीत में संगीतकारों द्वारा रागमलिका या रागमाला बनाये जाने के उदाहरण बहुत नहीं होंगे। ज्यादातर गीत...

कमर जलालाबादी : श्रद्धांजलि

स्व. कमर जलालाबादी की आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी सुपुत्री सुश्री सुभाषिनी स्वर के सहयोग से - किसी भी गीत को उम्दा...

Dastak (1970): मीना बाजार की सीमाओं पर रहते हामिद सलमा

दस्तक उन फिल्मों में से है जिन्हे (जिनकी कहानी को) चाहे पढ़ा जाये या देखा जाये वे एक गहरा असर पाठक और दर्शक पर छोड़ ही जाती...