मौसम (2011) : आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता

आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता जब जुल्फ की कालिख में घुल जाये कोई राही बदनाम सही...

कहीं बेख्याल होकर यूँ ही छू लिया किसी ने (तीन देवियाँ -1965)

ऐसा कोई भारतीय संगीत प्रेमी ढ़ूँढ़े से न मिल पायेगा जो देव आनंद अभिनीत तीन देवियाँ फिल्म के, मो. रफी की नाजुक और मखमली...

शान(1980): शोले की आन, बान और शान में घटोत्तरी

सत्तर का दशक बीत चुका था, अस्सी का दशक धड़ल्ले से आगमन कर गया था। अमिताभ बच्चन सफलता के पुष्पक विमान पर उड़ान भरते हुये...

सौदागर (1973) : चाहत जब तिजारत बन जाये

नारी बिचारी है पुरुष की मारी है तन से क्षुधित है मन से मुदित है लपककर झपककर अंत में चित्त है (रघुवीर सहाय) पतझड़ को ही...

अभिमान(1973): श्रेष्ठ है कला और प्रतिभा, स्त्री या पुरुष नहीं

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और...

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