आँधी (1975): तेरे बिना शिकवे न हों पर ज़िंदगी ज़िंदगी भी तो नहीं

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को। पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर...

स्मिता पाटिल दोहरी नैतिकता के मुखौटे के पीछे छिपने की मोहताज नहीं थीं … एक श्रद्धांजलि

अभिनेत्रियाँ तो स्मिता पाटिल से पहले भी बहुत आयीं और बाद में भी पर भारतीय सिनेमा में सबसे ज्यादा कमी किसी अभिनेत्री...

एक सौ सोलह चाँद की रातें : खुद चाँद भी नहीं लौटा पायेगा

फिक्र तौसवीं ने क्या कभी सोचा होगा कि उनकी कृति प्याज के छिलके का शीर्षक एक फिल्मी गीत के लिये एक रुपक का काम करेगा? पर...

Ijaazat (1987) : चाँदनी में जमीं से उठते सायों की स्मृतियाँ

इजाज़त के शुरु के कुछ मिनट और कतरा कतरा गाने का फिल्मांकन , दोनों बेहद जिम्मेदारी से भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने का काम...