दुनिया रंग रंगीली बाबा (धरती माता 1938) – के.एल.सहगल होने का अर्थ

पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक में समूचा भारत कुंदनलाल सहगल की आवाज़ के मोहपाश में यूँ ही नहीं बंध गया था। के.एल सहगल की...

कहीं बेख्याल होकर यूँ ही छू लिया किसी ने (तीन देवियाँ -1965)

ऐसा कोई भारतीय संगीत प्रेमी ढ़ूँढ़े से न मिल पायेगा जो देव आनंद अभिनीत तीन देवियाँ फिल्म के, मो. रफी की नाजुक और मखमली...

अभिमान(1973): श्रेष्ठ है कला और प्रतिभा, स्त्री या पुरुष नहीं

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और...

किशोर कुमार : हौले से छू चेतना जगाती सवेरे वाली लाली

करोड़ों लोगों के प्रिय गायक किशोर कुमार के जन्म दिवस की जयंती पर उनका पुनीत स्मरण। चाहे हिमालय के भव्य अस्तित्व का...

हे मैने कसम ली: मधुमास के सौन्दर्य को दर्शाता गीत

गीत फिल्म बनाने के लिये कतई जरुरी नहीं हैं, न अच्छी फिल्म बनाने के लिये और न सामान्य स्तर वाली या एक बुरी फिल्म बनाने के...